Rail Safety Boost : भारतीय रेलवे ने ट्रैक आधुनिकीकरण और सुरक्षा में बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं

Rail Safety Boost : भारतीय रेलवे ने ट्रैक आधुनिकीकरण और सुरक्षा में बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं

निरंतर निवेश से मजबूत हुई भारतीय रेलवे की ट्रैक सुरक्षा

भारतीय रेलवे ने बीते ग्यारह वर्षों में निरंतर निवेश और योजनाबद्ध कार्यान्वयन के जरिए अपने ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया है। इस सतत प्रयास का उद्देश्य केवल ट्रेनों की गति बढ़ाना नहीं, बल्कि रेल यात्रियों की सुरक्षा और नेटवर्क की विश्वसनीयता को सर्वोच्च स्तर पर ले जाना रहा है। ट्रैक नवीनीकरण, रखरखाव और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से रेलवे ने देशभर में सुरक्षित, तेज और सुचारू रेल संचालन को सुनिश्चित किया है।

2024-25 में 6,851 किमी ट्रैक नवीनीकरण, आगे भी तेज़ रफ्तार में काम

वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय रेलवे ने 6,851 किलोमीटर ट्रैक का नवीनीकरण सफलतापूर्वक पूरा किया। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक ट्रैक नवीनीकरण कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही रेलवे ने 2026-27 के लिए 7,900 किलोमीटर ट्रैक नवीनीकरण की स्पष्ट योजना बनाई है। यह निरंतरता इस बात का संकेत है कि रेलवे संपत्ति की सुरक्षा, दीर्घकालिक मजबूती और संचालन की विश्वसनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।

टर्नआउट नवीनीकरण और बैलास्ट डीप स्क्रीनिंग से बढ़ी स्थिरता

ट्रेनों के सुचारू और सुरक्षित आवागमन के लिए टर्नआउट नवीनीकरण में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2024-25 में रेलवे ने 7,161 थिक वेब स्विच और 1,704 वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग उपलब्ध कराईं। वहीं 2025-26 में 8,000 से अधिक थिक वेब स्विच और 3,000 से ज्यादा वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग प्रदान की जा रही हैं। इसके साथ ही ट्रैक की मजबूती और सवारी की गुणवत्ता सुधारने के लिए 2024-25 में 7,442 किलोमीटर बैलास्ट की मशीनीकृत डीप स्क्रीनिंग की गई, जबकि 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक कार्य जारी है।

ट्रैक मशीनों और फेंसिंग से सुरक्षा को मिला तकनीकी सहारा

मशीनीकृत रखरखाव को बढ़ावा देने के लिए भारतीय रेलवे ने 2014 से अब तक 1,100 से अधिक आधुनिक ट्रैक मशीनों की खरीद की है। इससे रखरखाव की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके अलावा, मवेशियों के कटने और अतिक्रमण की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे ट्रैक के किनारे सुरक्षा फेंसिंग को प्राथमिकता दी गई है। अब तक लगभग 15,000 किलोमीटर ट्रैक पर फेंसिंग की जा चुकी है, खासकर उन रूट्स पर जहां ट्रेनें 110 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक की गति से संचालित होती हैं।

हाई-स्पीड सक्षम ट्रैक दोगुने से अधिक, 80% नेटवर्क पर 110 किमी/घंटा संभव

इन सभी प्रयासों का सबसे बड़ा परिणाम यह है कि भारतीय रेलवे के हाई-स्पीड सक्षम ट्रैक की लंबाई में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में जहां 110 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक की गति वाले ट्रैक की लंबाई 31,445 किलोमीटर (लगभग 40 प्रतिशत नेटवर्क) थी, वहीं अब यह बढ़कर 84,244 किलोमीटर हो गई है, जो कुल राष्ट्रीय रेल नेटवर्क का करीब 80 प्रतिशत है। इससे न केवल ट्रेनों की गति और समयबद्धता में सुधार हुआ है, बल्कि यात्रियों को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद रेल सेवा भी सुनिश्चित हुई है।