भ्रष्टाचार का डैम रिसा, किसानों के सब्र का बांध टूटा !

भ्रष्टाचार का डैम रिसा, किसानों के सब्र का बांध टूटा !

चकिया : उत्तर प्रदेश के चंदौली स्थित चंद्रप्रभा बांध की मरम्मत और उससे जुड़े नहरों की साफ -सफाई न होने से स्थानीय किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है । शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन की अगुवाई में सैंकड़ों किसान सिंचाई विभाग के दफ्तर परिसर में धरना देने पहुंचे ।  इस दौरान उन्होने एसडीएम दिव्या ओझा को एक माँग पत्र भी सौंपा । 

किसानों ने दिनभर एसडीएम दफ्तर पर ही बिताया और अपने हाथों से बना खाना भी एक दूसरे को खिलाया । इसी तरह के सहयोग की अपेक्षा वो अधिकारियों से भी कर रहे हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है । 

कायदे से तो जलाशय में एक तरफ पानी भरा होना चाहिए और दूसरी तरफ पानी ज़रूरत के हिसाब से निकलना चाहिए । लेकिन सरकारी सिस्टम ने इसमें इतने छेद कर दिए हैं कि फसल की सिंचाई के लिए यहां पानी बचता ही नहीं है । इसी भ्रष्टाचार से किसान नाराज हैं और लगातार बांध की मरम्मत और कैनाल को ठीक कराने जैसी तमाम मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं । 

चकिया और नौगढ़ के बीच चंद्रप्रभा नदी पर 1960 में बांध का निर्माण किया गया था तब एक बड़ा मकसद था पहाड़ी क्षेत्र में फसलों की सिंचाई के लिए खेतों तक पानी पहुंचाना । सरकार को इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली । ये इलाका धान के कटोरे के नाम से मशहूर भी हो गया । पर लापरवाही से 3 दशक पहले रिसाव की समस्या खड़ी हो गई जो अब भी जारी है । 

65 साल में बांध की मरम्मत पर कितना खर्च हुआ 

 साल 2023 में ही सरकार ने इस बांध की मरम्मत के लिए 12 करोड़ 6 लाख रुपये दिए थे लेकिन मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति ही हुई । पहले  2006 में सरकार ने मरम्मत के लिए  5 करोड़ 23 लाख रुपये आवंटित किए । 2008 में मरम्मत काम शुरू तो हुआ लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ । बांध के गेट से रिसाव बंद नहीं हुआ । 

इसके बाद 2009 के अंतिम 3 महीने में तेजी से काम हुआ लेकिन इस बार भी नतीजा सिफर ही रहा । इसी तरह 2011 में मरम्मत पर 35 लाख रुपए खर्च हुए । 2021 में, 6.83 करोड़ रुपये की योजना शासन को भेजी गई लेकिन तब पैसा नहीं मिला और 2023 में 12.58 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई । 

लेकिन मामला अब भी जहां का तहां है । कहा जा रहा है कि मरम्मत के नाम पर आ रही करोड़ों की धनराशि के एक बड़े हिस्से की बंदरबाँट हो जाती है । इंजीनियर्स भी पूरे मसले पर सवालों के घेरे में हैं । बांध के मुख्य गेट की मरम्मत करीब 12 साल पहले कराई गई थी ।  

इसके बाद काफी समय तक बांध का मरम्मत कार्य नहीं कराए जाने से इसके गेटों में बड़े-बड़े छेद हो गए हैं । इससे बांध का सारा पानी बह कर बर्बाद हो जा रहा है । वर्तमान में स्थिति ये है कि बांध में एक बूंद भी पानी नहीं बच पा रहा है । 

 बांध की मरम्मत हो जाए तो क्या होगा फायदा 

यदि बांध की ठीक से मरम्मत हो जाए तो  इससे जुड़ी 53 नहरों में पानी की आपूर्ति बेहतर तरीके से होगी । इससे लगभग 5,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई संभव हो सकेगी । साथ ही राजदरी-देवदरी जलप्रपात को भी साल भर पानी मिल पाएगा । ऐसे में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और इलाके में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा ।

 लेकिन फिहलात ऐसा होता नहीं दिख रहा है । स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी यहां पिकनिक मनाने तो आते हैं लेकिन समस्या पर ध्यान नहीं देते । इतना ही नहीं आवाज उठाने पर किसानों को धमकाते भी हैं ।